जयपुर। देश-विदेश में सिंधी समाज के 150 प्रेम प्रकाश आश्रमों ने 'श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ' की वाणी को स्कूल और कॉलेजों के हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल कराने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। राजधानी जयपुर के एमआईं रोड स्थित श्री अमरापुर स्थान से संतों ने विधानसभा स्पीकर, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और शिक्षामंत्री, पाठ्य पुस्तक मण्डल को पत्र लिखकर इस आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की बहुत समय से मांग की हुई है। श्री अमरापुर स्थान के संत मोहन प्रकाश महाराज एवं स्वामी मनोहरलाल ने बताया कि 'डिब वाले साई' स्वामी टेऊंराम के जीवन दर्शन, उनकी 16 शिक्षाओं और वाणी (दोहे, पद, छंद, भजन) को पाठ्य पुस्तकों में स्थान मिलना चाहिए। समाज इस ग्रंथ को वेदों और शास्त्रों का सार मानता है। सिंध में रेतीले टीलों पर दरबार बनाने के कारण स्वामी टेऊंराम को 'डिब वाले साई' के नाम से ख्याति मिली थी। उनकी वाणी में सामाजिक समरसता और विश्व बंधुत्व का संदेश समाहित है।
स्वामी टेऊँरामजी महाराज द्वारा रचित इस 800 पृष्ठीय "प्रेम प्रकाश ग्रंथ" में लगभग 1500 दोहे, 800 पद्य, 500 छंद और 2000 भजनों का संग्रह है। इसमें 'दोहावली' और 'ब्रह्मदर्शनी' सोलह शिक्षाएं, सलोक माला, शांति के दोहे जैसी प्रमुख रचनाएं शामिल हैं। समाज का मानना है कि इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने से युवाओं को नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चिंतन की नई दिशा मिलेगी। स्वामी मनोहरलाल महाराज (जयपुर) संत मोहनलाल महाराज, संत मोनूराम, (जयपुर) स्वामी रामप्रकाश (अजमेर) संत नवीन, संत श्यामलाल (कोटा) संत लक्ष्मणदास (अमदाबाद), संत परसराम (जलगांव) संत भोलाराम (कानपुर ) संत जीतूराम (जोधपुर) संत शंभूलाल (ब्यावर) संत गुरुदास (जयपुर) संत कमल (गांधीधाम), संत हिमांशु लाल (हरिद्वार), संत शंकरलाल (मुम्बई) सहित अन्य संतो की मांग है। साथ ही अनेक गणमान्य बी. डी. टेकवानी, राजकुमार संगतानी, गोर्वधन दास आसनानी, कुमार विधानी, जितेंद्र दाधीच,(शिक्षक), दिलीप पारवानी सिंधु गौरव, वरुण टेकवानी, प्रदीप मालिक सहित अन्य की अनेक समय से मांग है कि शीघ्र ही सदगुरु टेऊँरामजी महाराज द्वारा रचित आध्यात्मिक वाणी दोहे, पद छंद, भजन, कवित इत्यादि को हिन्दी पाठ्य पुस्तकों में शामिल किया जाए।



