पूर्व मेयर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले अभियुक्त ने मांगी माफी

जयपुर। जयपुर की पूर्व मेयर ज्योति खण्डेलवाल के खिलाफ न्यायालय में तत्कालीन नगर निगम की ठेका फर्म प्रहरी प्रोटेक्शन सिस्टम प्रा. लिमिटेड के डायरेक्टर कमलजीत सिंह और कम्पनी के अधिकारी दीपक जैन ने सैशन कोर्ट और उच्च न्यायालय में अपनी जमानत याचिका में शपथ पत्र देकर झुठे आरोप लगाए थे। ठेका कम्पनी के डायरेक्टर व कार्यरत अधिकारी ने सर्विस टेक्स की चोरी की थी, जिसकी जानकारी कमिश्नर, सेन्ट्रल एक्साइज जयपुर प्रथम को होने पर विभाग द्वारा ठेका कम्पनी पर छापा डालकर सभी दस्तावेज बरामद करते हुए आपराधिक प्रकरण दर्ज कर उनके खिलाफ कार्यवाही की गई। इसके बचाव में कमलजीत सिंह व दीपक जैन ने अपनी जमानत याचिकाओं में पूर्व मेयर ज्योति खण्डेलवाल के विरूद्ध झूठे भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर अग्रिम जमानत मांगी। साथ ही अपना जूर्म कबूल करते हुए 2 करोड़ रुपए सर्विस टेक्स पेटे दस दिनों में जमा कराने का समय मांगा। इस पर उच्च न्यायालय ने उनके अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। पूर्व मेयर ज्योति खण्डेलवाल के वकील बंशीधर बडाया ने मीडिया को बताया कि जमानत याचिका में ठेका कम्पनी के डायरेक्टर व अन्य द्वारा भ्रष्टाचार के झूठे आरोपों की खबर समाचार पत्रों में उस समय प्रकाशित होने पर पूर्व मेयर ज्योति खण्डेलवाल ने न्यायालय में मानहानि का परिवाद पेश किया, जिस पर न्यायालय ने दिनांक 24.9.2015 को इन अभियुक्तों के विरूद्ध मानहानि के अपराध का प्रसंज्ञान लेकर तलब किया। इस दौरान विचारण अभियुक्त दीपक जैन ने सार्वजनिक रूप से लिखित में न्यायालय के समक्ष ज्योति खण्डेलवाल से माफी मांगते हुए माफीनामा प्रस्तुत किया। दीपक जैन ने माफीनामा में बताया कि वह केवल इस ठेका फर्म में कर्मचारी की हैसियत से कार्य करता था और किसी भी प्रकार के निर्णय में उसकी कोई भूमिका कभी नहीं रही।
साथ ही दीपक जैन ने माफीनामा में बताया कि ठेका फर्म में कार्य करते हुए प्रहरी प्रोटेक्शन के डायरेक्टर कमलजीत सिंह द्वारा कई खाली कागजों पर हस्ताक्षर कर अपने पास रख लिए थे, जैसा उसकी जानकारी में है। जमानत याचिका में उन्ही खाली कागजों का इस्तेमाल करते हुए पूर्व मेयर ज्योति खण्डेलवाल पर झूठे आरोप लगाए थे और जिसकी उसे कोई जानकारी नही थी। उसे इस सम्बन्ध में जानकारी कोर्ट के सम्मन प्राप्त होने पर ही हुई थी। पूर्व मेयर ज्योति खण्डेलवाल ने बताया कि न्यायालय में कमलजीत सिंह, जो कि इस मामले में मुख्य अभियुक्त है, उसके खिलाफ न्यायालय से जारी स्टेडिंग वारंट की पालना के लिए पुलिस कमिश्नर जयपुर और पुलिस महानिदेशक जयपुर को निर्देश देने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया, जिस पर न्यायालय ने कमलजीत सिंह के खिलाफ जारी स्टेडिग वारंट की प्रगति रिपोर्ट व थाने के भगोड़े रजिस्टर के कमांक व दिनांक सहित जरिए पुलिस कमिश्नर जयपुर के मार्फत रिपोर्ट तलब की है। साथ ही न्यायालय ने कड़ा रूख अपनाते हुए धारा 82-83 सीआरपीसी के तहत जिसमें अभियुक्त कमलजीत सिंह की सम्पत्ति कुर्क करने का प्रावधान है, के आदेश दिए और 446 सीआरपीसी के तहत कमलजीत सिंह के जमानती को भी नोटिस जारी करने के आदेश दिए।

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