मानव मूल्यों व न्याय के अधीन हो प्रौद्योगिकियों का उपयोग– जस्टिस ऑगस्टीन

जयपुर। डॉ.भीमराव अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी जयपुर एवं एसएस जैन सुबोध लॉ कॉलेज जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में विकसित भारत 2047 के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल जस्टिस थीम पर दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ शनिवार 9 मई को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के न्यायाधीश जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह के मुख्य आतिथ्य में किया गया। डॉ भीमराव अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी के सलाहकार (जनसंपर्क) विक्रम राठौड़ ने बताया कि इस सम्मेलन के लिए देशभर से लगभग 180 प्रतिभागियों ने पंजीकरण करवाया। इस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के जरिए विभिन्न प्रतिभागी शिक्षाविद, न्यायविद, शोधार्थी और नीति विशेषज्ञों ने एक मंच पर आकर अपने विचारों, शोध निष्कर्षों और कानूनी दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान जीएएलटीईआर और डॉ भीमराव अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी जयपुर के बीच एक अनुसंधान संबंधित एमओयू भी हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के न्यायाधीश जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने न्यायपालिका की बदलती भूमिका, संविधान की गरिमा एवं युवा विधि विद्यार्थियों की जिम्मेदारियों पर प्रेरणादायी उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक को मानव मूल्यों एवं न्याय के अधीन रहकर कार्य करना चाहिए। विशिष्ट अतिथि पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ श्रीलंका के जस्टिस मोहन पीरिस ने कहा कि अधिवक्ता का कार्य कोई व्यवसाय ना होकर एक कर्तव्यनिष्ठ पैशा है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक अनुभव साझा करते हुए न्याय व्यवस्था में तकनीकी महत्वपूर्ण भूमिका को स्पष्ट किया। विशिष्ट अतिथि कुलपति प्रो. डॉ. परमजीत एस. जसवाल ने सामाजिक न्याय एवं एआई गवेर्नेन्स पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति का वास्तविक मूल्य तभी है, जब वह समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए समानता, समावेशन एवं न्याय सुनिश्चित करे। सम्मानित अतिथि प्रो. (डॉ.) वी विजय कुमार ने राजनीतिक लोकतंत्र, सामाजिक न्याय एवं भारतीय संवैधानिक मूल्यों पर प्रभावशाली व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि एआई मानव का सहायक है, उसका स्वामी नहीं। उन्होंने स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व जैसे संवैधानिक आदर्शों को विकसित भारत 2047 की आधारशिला बताया। कुलगुरु प्रो. डॉ. निष्ठा जसवाल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विधि शिक्षा, संवैधानिक मूल्यों एवं समकालीन चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच संवैधानिक मूल्यों की रक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सुशासन एवं संवैधानिकता की आवश्यकता पर बल दिया। समारोह के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव वीरेंद्र कुमार वर्मा ने सभी का आभार जताया।

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