"अपने बच्चों के लिए एक दुनियां की तरह होती है मां, तभी तो अनमोल होती है मां"
"बिना बताए अपने बच्चों के मन की बातों को जान लेती है मां, तभी तो अनमोल होती है मां"
"परिवार के प्रति अपनी सभी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाती है मां, तभी तो अनमोल होती है मां"
"अपने परिवार को सभी मुसीबतों से बचाती रहती है मां, तभी तो अनमोल होती है मां"
"परिवार के सभी सदस्यों का हर पल ख्याल रखती है मां, तभी तो अनमोल होती है मां"
"परिवार में हमेशा रौनक बनाए रखती है मां, तभी तो अनमोल होती है मां"
"परिवार में सबका ध्यान रखकर खुद का ध्यान नहीं रखती मां, तभी तो अनमोल होती है मां"
"सबको खिलाकर कभी खुद भूखी सो जाती है मां, तभी तो अनमोल होती है मां"
"अपने दर्द किसी को बताए बिना सबके दर्द को सुनती है मां, तभी तो अनमोल होती है मां"
"खुद की चिन्ता किए बिना सबकी चिन्ता करती है मां, तभी तो अनमोल होती है मां"
कविता के लेखक
गोविन्द गोपाल सिंह
(सम्पादक)



