मदर्स डे पर स्पेशल स्टोरी
मां की ये बातें आज भी मेरे कानों में रोजाना रात में गूंजती हैं और मेरी आँखें नम हो जाती हैं, जब कभी काम की वजह से रात में मुझे बाहर देर हो जाती थी तो मां का कॉल आ जाता था बेटा गोविंद कहां है और घर कब तक लौटेगा, खाना बाहर ही खाकर आएगा या तेरा खाना बनाना है। मुझे क्या पता था कि मेरी मां की यही बातें मुझे जीवनभर सताएंगी व रुलाएंगी। मुझे घर आने और खाने के लिए पूछने वाली मेरी मां हमेशा के लिए मुझसे जुदा होकर बहुत दूर जा चुकी हैं, जो कभी लौटकर तो नहीं आने वाली लेकिन उनकी बातें मेरे जेहन में मरते दम तक जिंदा रहेंगी। मेरे जीवन से मेरी मां के इतनी जल्दी चले जाने के बाद से ही मैं अधूरा रह गया हूं और मुझे रोजाना रह रहकर अपनी मां की सभी बातें मुझे सताती रहती हैं। मुझे बचपन से ही मेरी मां का प्यार मेरे पिता से ज्यादा मिलता रहा और मां के जीवित रहने तक मेरी जिन्दगी की निजी बातें और जरूरतें मैं केवल अपनी मां से ही शेयर करता था। जब भी मुझे पैसों की या किसी भी चीज की जरूरत होती तो मां से ही कहता था। इतना ही नहीं अपने मन की ज्यादातर बातें मैं अपनी मां से ही करता था। हालांकि मेरी एक बड़ी और दो छोटी बहनें हैं और पिताजी हैं लेकिन मुझे सबसे ज्यादा प्यार और लगाव मेरी मां से ही रहता था। इस तरह जितना प्यार और लगाव मेरी मां से मुझे था, उससे कहीं ज्यादा प्यार मेरी मां मुझे करती थी और हमेशा मेरा ध्यान रखती थी अगर किसी दिन सुबह मुझे घर से जल्दी ऑफिस या किसी काम से बाहर जाना होता तो बहनों के रहते हुए भी मां मेरे लिए अपने हाथों से खाना तैयार करके मुझे परोस देती थी और कहती थी बिना कुछ खाए घर से बाहर मत निकलना। इस तरह मेरी मां की हर एक बातें मेरे कानों में गूंजती रहती हैं। मुझे आज भी 14 दिसम्बर 2025 का वह दिन याद आता है तो मेरी रूह तक कांप जाती है, जब मां केवल 56 वर्ष की आयु पूरी करके इस जीवन में मेरा साथ छोड़कर हमेशा के लिए मुझसे रुखसत हो गई। इस तरह मैंने कभी सपने भी नहीं सोचा था कि इस दुनिया में मुझे लाने वाली मेरी मां इतनी जल्दी इस दुनिया को अलविदा कहते हुए मुझे हमेशा के लिए छोड़ जाएगी। मुझे हमेशा यही दुःख सताता रहता है कि एक बेटा होने के नाते मैं अपने जीवन में मां के जीवित रहते उनको वो सभी सुख नहीं दे सका, जो एक बेटे को देना चाहिए। मां के जीवित रहते शादी करके अपनी मां को बहु और पौते-पोती का सुख नहीं दे सका। मां के कुछ ऐसे सपनों को पूरा नहीं कर सका, जो वास्तव में मुझे करने चाहिए थे। मुझे इसी बात का पछतावा हमेशा रहता है और मरते दम तक रहेगा कि आखिर क्यों नहीं मैं अपनी मां के सपनों को पूरा करके उनको जो सुख देना चाहिए था, वो नहीं दे सका। शायद इसके लिए मां ने तो मुझे माफ कर दिया होगा लेकिन मैं खुद को मरते दम तक कभी माफ नहीं कर सकूंगा।
सम्पादक की कलम से…..



