जयपुर। चिकित्सा विभाग का राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम उन बच्चों के लिए वरदान सरीखा साबित हुआ है, जो पैदाईश से ही विभिन्न शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे थे। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रयासों से इन बच्चों का इलाज निशुल्क किया गया और साथ ही उनके स्वस्थ और खुशहाल भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जयपुर द्वितीय डॉ. मनीष मित्तल ने बताया कि हाल ही में 9 माह के शिशु चित्रांश को जन्मजात ह्रदय रोग से मुक्ति मिली है। ब्लॉक बस्सी के ग्राम चतरपुरा निवासी और पेशे से कृषि कार्य करने वाले पिता हनुमान प्रसाद बैरवा की आर्थिक स्थिति कमजोर थी।चित्रांश जन्म के बाद से ही अस्वस्थ रहने लगा था। गत 1 मई को जब राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाईल हैल्थ टीम "बी" (बस्सी) द्वारा आयोजित स्वास्थ्य परीक्षण शिविर में शिशु में ह्रदय रोग के लक्षण चिन्हित किए गए। मोबाईल हैल्थ टीम के डॉ. उमेश गोयल, डॉ. अंजू राव और एएनएम बर्फी बाई मीणा ने आवश्यक चिकित्सा परामर्श के बाद चित्रांश को जयपुर स्थित मंगलम प्लस मेडिसिटी अस्पताल में रैफर कर दिया। टीम ने पिता हनुमान प्रसाद बैरवा को हिम्मत बंधाई और समस्त ईलाज निःशुल्क होने के विषय में बताया। बालक चित्रांश को गत 6 मई को मंगलम प्लस मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां टू डी ईको की जाँच में उसके ह्रदय में छेद की पुष्टि हुई। अस्पताल में डॉ. अभिमन्यु उप्पल और और उनकी टीम ने गत 7 मई को बालक चित्रांश के ह्रदय का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन सफल रहा और मासूम चित्रांश को जन्मजात ह्रदय रोग की तकलीफ से मुक्ति मिल गईं। चिकित्सकों की देखरेख में रहने के बाद गत 8 मई को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। आज चित्रांश पूर्ण स्वस्थ है और उसके पिता हनुमान प्रसाद की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं है। वह राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, चिकित्सकों और राज्य सरकार के प्रति कृतज्ञ हैं, जिनके प्रयासों से उनके बच्चे का ऑपरेशन निःशुल्क हुआ और उसे एक गंभीर रोग से मुक्ति मिल गई। इसमें सीएमएचओ डॉ. मनीष मित्तल, बीसीएमओ बस्सी डॉ. जे.पी. मीणा, एडीएनओ डॉ. दिलीप शर्मा और आरबीएसके मोबाईल हैल्थ टीम का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।



