मेरी मां स्वर्गीय श्रीमती सुनिता देवी जी के आशीर्वाद और परम पिता परमेश्वर की असीम कृपा से आज विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर दिनांक 3 मई 2026 को जयपुर से प्रकाशित हुए दैनिक समाचार पत्र "हेरिटेज पत्रिका" का पहला अंक मैं अपनी मां के श्री चरणों में समर्पित करता हूं क्योंकि मेरी मां का एक प्रमुख सपना था कि उनका इकलौता बेटा अपना खुद का एक अखबार शुरू करे और उनके इस सपने को पूरा करते हुए मैंने आज से अपना स्वयं का दैनिक समाचार पत्र प्रकाशित करना शुरू किया है। वैसे तो मुझे बहुत खुशी है कि मैने अपनी मां के एक मुख्य सपने को पूरा करते हुए यह नया कार्य शुरू किया है लेकिन मुझे जितनी खुशी है, उससे कहीं ज्यादा दुख इस बात का है कि मैं इस शुभ कार्य को अपनी मां के जीवित रहते नहीं कर सका जबकि मां मुझे हमेशा यही कहती और पूछती थी कि बेटा तू खुद का अखबार कब से शुरू करेगा क्योंकि तूझे पत्रकारिता करते हुए इतने वर्ष हो गए और तूने पत्रकारिता में मास्टर डिग्री भी कर रखा है तो फिर तू खुद का एक अखबार निकालना कब शुरू करेगा। मेरी मां की इन बातों को सुनकर मैं उनसे यही कहता था कि मां आप चाहती हो तो मैं एक ना एक दिन खुद का अखबार शुरू करके रहूंगा और आज मैंने मेरी मां का एक यह सपना पूरा कर दिया लेकिन मुझे बहुत अफसोस और दुःख है कि मैं यह अनूठा कार्य मेरी मां के आंखों के सामने नहीं कर सका जबकि उनके आंखों के सामने मेरा खुद का अखबार शुरू होता तो यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशी होती और यह पल मुझे एक अलग ही आनन्द देता। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, इसी कारण मुझे इस दुनिया में लाने वाली मेरी जीवनदायिनी ने अपने जीवन के लगभग 56 वर्ष व्यतीत कर 14 दिसम्बर 2025 की सुबह इस दुनिया को अलविदा कह गईं। मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि मेरी मां को ईश्वर ने स्वर्ग में ही जगह दी होगी। जैसा कि मेरी मां ने मुझे बताया था कि जब उनका विवाह हुआ था तब उनकी आयु केवल लगभग 15 साल की रही थी। इतनी अल्प आयु में विवाह बंधन में बंधकर एक नाबालिग पत्नी के तौर पर अपना गृहस्थ जीवन शुरू करने वाली मेरी मां ने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किए और जहां तक मैं मानता हूं मेरी मां ने अपने जीवन में जितने संघर्ष किए और दुःख सहे उसके बदले उनको जो सुख मिलने चाहिए थे, वो रत्ती भर भी नहीं मिले शायद उनकी किस्मत में यही लिखा था। फिर भी मुझे मेरी मां के लिए इस बात का गर्व है और जीवन पर्यन्त रहेगा कि वह हंसमुख, धार्मिक प्रवृति, सत्कर्म करने वाली और सद्गुणों से भरी हुई पतिव्रता नारी थी इसलिए उनकी मृत्यु सुहागिन महिला के तौर पर हुई क्योंकि यह सर्वविदित है और शास्त्रों में भी वर्णित है कि किसी भी विवाहित महिला की मृत्यु यदि सुहागिन रहते होती है तो उनको निश्चित ही स्वर्ग लोक में ही जगह मिलती है। साथ ही मुझे इस बात का भी फक्र है कि आज मैंने अपनी मां के एक मुख्य सपने को पूरा कर दिया है। ईश्वर ने चाहा और मेरी मां का आशीर्वाद मुझ पर बना रहा तो मैं उनके दूसरे सपने को भी पूरा करके उनकी आत्मा को तृप्त करने की पूरी कोशिश करूंगा, जो कि मां ने मेरे लिए देखे थे कि उनके जीवित रहते उनकी आंखों के सामने उनके बेटे की शादी हो जाए लेकिन मुझे इस बात का भी बहुत पछतावा और अफसोस है कि मैं उनके जीवित रहते उनके इस सपने को साकार नहीं कर सका। मेरी सभी गलतियों के लिए तो मैं स्वयं को कभी माफ नहीं करूंगा क्योंकि जो प्रमुख कार्य मेरी मां के जीवित रहते मुझे करने चाहिए थे, वो मैं नहीं कर सका लेकिन ये भी बिल्कुल सत्य है कि उस ईश्वरीय शक्ति के आगे हम चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते क्योंकि होता वही है, जो ईश्वर चाहता है जबकि अपने चाहने से कुछ नहीं होता। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मैं अपनी मां के श्री चरणों में पुनः नमन करते हुए पूर्ण विश्वास रखता हूं कि मेरी मां का प्यार और आशीर्वाद जीवन पर्यन्त मुझे मिलता रहेगा।🙏🏻
गोविन्द गोपाल सिंह
(सम्पादक)
दैनिक हेरिटेज पत्रिका



