जयपुर। विश्व मांगल्य सभा अब राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर दुनिया का पहला ‘सप्त मातृ सम्मान’ देने जा रही है। यह सम्मान समाज में सामान्य से दिखने वाली घर-परिवार को संभालते हुए सेवा, शक्ति, मातृत्व, धर्म इत्यादि सात क्षेत्रों में सराहनीय कार्य करने वाली सप्त माताओं को दिया जाएगा। यह जानकारी विश्व मांगल्य सभा की जयपुर प्रांत उपाध्यक्ष नीता बूचरा (जैन) ने दी। बूचरा ने यह बात विश्व मांगल्य सभा जयपुर प्रांत द्वारा जेएलएन मार्ग स्थित इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान में सोमवार 4 मई को आयोजित जयपुर प्रांत अधिवेषन ‘मातृत्व संस्कार समागम-परम्परा एवं परिपक्वता का संगम’ को संबोधित करते हुए दी। सप्त मातृ सम्मान की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए नीता बूचरा ने कहा कि देश दुनिया में ऐसी अनेक माताएं हैं, जो दिखने में सामान्य है लेकिन उन्होंने अपने परिवार का कुशलता पूर्व लालन-पालन करने के साथ ही सेवा, शक्ति, मातृत्व, धर्म इत्यादि क्षेत्र में भी असामान्य कार्य किए हैं। ऐसी सप्त मातृ का सम्मान जयपुर प्रांत अधिवेशन में किया गया है। यही सम्मान प्रांत स्तर पर देशभर में 22 प्रांत अधिवेशनों में किया जाएगा। प्रांतों के बाद सभा द्वारा इस प्रकार का सप्त मातृ सम्मान पहले राष्ट्रीय स्तर पर और उसके बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी शुरू करेगी, जो इस प्रकार का दुनिया का पहला सम्मान होगा।
उन्होंने बताया कि जयपुर प्रांत अधीवेशन में कला क्षेत्र में डॉ लीला बोर्डिया, ज्ञान क्षेत्र में रूपल पोद्धार, उद्यम क्षेत्र में मंजू अग्रवाल, मातृ क्षेत्र में कृष्णा देवी सारडीवाल, शक्ति के क्षेत्र में दीप्ती शर्मा, सेवा क्षेत्र में डॉ. मधु गुप्ता और धर्म क्षेत्र में प्रियंका मोदी का सम्मान किया गया। यह सम्मान सभा की राष्ट्रीय संगठन मंत्री वृषाली ताई, सह संगठन मंत्री पूजा देशमुख और राजस्थान सरकार में राज्यमंत्री मंजू बाघमार के हाथों प्रदान किया गया। अधिवेशन के प्रथम सत्र में जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा और भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्षा रेखा राठौड़ भी मंच पर उपस्थित रहीं। मातृशक्ति को संबोधित करते हुए सांसद मंजू शर्मा ने नई पीढी में बच्चों की संख्या कम होने के साथ ही रिश्तों की आत्मीयता कमजोर होने पर चिंता व्यक्त की, जबकि प्रदेशाध्यक्ष राखी राठौड़ ने फैशन के साथ परिवार की मर्यादाओं का भी ध्यान रखने की सीख दी। जयपुर प्रांत की अध्यक्षा सुनीता राजौरिया ने सभा की स्थापना और उसके उद्देश्य पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय संगठन मंत्री वृषाली ताई ने पंच परिवर्तन में से एक परिवर्तन ‘स्व का बोध’ विषय और सह संगठन मंत्री पूजा ताई ने परम्पराओं और संस्कारों से बढती दूरी पर चिंता जाताते हुए अपने जड़ों से जुड़ने का आह्वान किया।



